खिलाफते राशिदा सानी (IInd) पर 100 सवाल (59-60)

➡सवाल नं. (59): क्या खिलाफत में प्राइवेट सेक्टर (निजी क्षेत्र) होगा?








✅इस वक़्त ज़्यादातर मुस्लिम देशों के हुक्मरॉ मुसलमानों को बुनियादी सुविधाए व सेवाएं देने में नाक़ामायाब हुए है, जिसकी वजह से वहॉ प्राइवेट सेक्टर को आर्थिक क्षेत्र में फलने-फूलने का मौक़ा मिला है। इस तरह बहुत सी विदेशी कंपनीयों और हुकुमत के क़रीबी स्वदेशी उद्योगपतियों और व्यापारीयों को कारोबार करने के लिए बेहतरीन मार्किट उपलब्ध हुआ ।

✔इस्लाम, मिल्कियत (समपत्ति) रखने के खिलाफ नही है और ना ही निजी मिल्कियत के खिलाफ है। लेकिन इस्लाम ने मिल्कियत (समपत्ति) को तीन दायरो मे बाटा है. निजी, सार्वजनिक और हुकूमत की मिल्कियत. हुकूमत की मिल्कियत मे सिर्फ वोह मिल्कियत होती जितना हुकूमती इदारो को इंतेज़ाम चलाने के लिये दरकार है. सार्वजनिक मिल्कियत मे हुकूमत का अमल-दखल सिर्फ उसके मुंसिफाना बटवारे और इंतज़ाम तक महदूद है.

✔पब्लिक प्रोपर्टी (जन संपत्ति) जो सार्वजनिक क्षेत्र के दायरे में आती है, उन्हें किसी व्यक्ति की मिल्कियत मे देने की ईजाज़त नही दी है। इस तरह इस्लाम उन चीज़ों को निजी क्षेत्र में देने की ईजाज़त नही देता, जिससे ज़्यादातर लोगों की ज़रूरत पूरी होती हैं ।

✔खिलाफत में पब्लिक सेक्टर का मक़सद यह होता कि हर इंसान की बुनियादी ज़रूरतों और सेवाएं जैसे शिक्षा, हेल्थ केयर (अस्पताल, दवाइयॉ) उन तक पहुँचाई जाए ताकि कोई भी शख्स चाहे अमीर हो या ग़रीब अपनी ज़िन्दगी शान से जी सके, और किसी का मोहताज ना रहे।

✔प्राइवेट सेक्टर तरक्की में अहम किरदार अदा करेगें इसलिए उनका काम पब्लिक सेक्टर की मदद करना होगा ना कि पब्लिक सेक्टर का माल पर क़ाबिज़ होना है जिसकी उन्हे इजाज़त नही है और जैसा कि आम तौर पर पूंजीवाद में होता है जहाँ सरकार ज़मीनें सिर्फ ठेकेदारों को दे देती है जबकि लोगों के पास रहने के लिए घर नही होते है।

✔प्राइवेट इन्टरप्राइज़ेज़ की हौसला अफज़ाई की जायेगी और उन्हें आगे बढ़ने के मौक़े दिए जाएंगे। इसके साथ ही मिनिमम टेक्स सिस्टम स्थापित करके (जिसमें फिज़ूल के कई सारे टेक्स नही होगें) बिज़नेस को बढ़ावा दिया जाएगा।

🌙🌙खिलाफते राशिदा सानी (IInd) पर 100 सवाल🌙🌙

➡सवाल नं. (60): क्या खिलाफत इण्डस्ट्री (उद्योगों) का राष्ट्रीयकरण करेगी?


✅ इस्लाम में राष्ट्रीयकरण का तसव्वुर नही पाया जाता। मिल्कियत की आज़ादी (Freedom of Ownership) की शोषण कारी की फितरत ज़ाहिर होने के बाद पूंजीवाद ने राष्ट्रीयकरण को इसके हल के तौर पर अपनाया। मिल्कियत की आज़ादी के नतीजे मे कुछ लोग कई अहम चीज़ों (पानी, जंगल, ज़मीन इत्यादि) के मालिक बन गए जिसके सबब हुकुमत और जनता के बीच जंग शुरू हुई तब उन्होंने इसमें पैबन्दकारी के लिए राष्ट्रीयकरण का तसव्वुर गढा, जहाँ राष्ट्रहित को मद्दे नज़र रखते हुए कुछ चीज़ें निजी हाथों से निकल कर पब्लिक सेक्टर की तरफ मुंतक़िल कर दी गई।

✔इस्लाम में हक़े मिल्कियत (कौन किस चीज़ का मालिक होगा/Ownership of properties) के बारे में बहुत साफ तौर पर कायदे-क़ानून मौजूद है। यह सभी क़ायदे-क़ानून बताते कि किस चीज़ का क्या इस्तेमाल है और उससे किस तरह के फायदे उठाये जाये। इस्लाम उन सभी चीज़ो को पब्लिक प्रोपर्टी (सार्वजनिक मिल्कियत) मानता है जो बुनियादी ज़रुरत से ताल्लुक़ रखती है व जिनके बिना इंसानी समाज की बक़ा (अस्तित्व) खतरे मे पड़ जाती है. और रियासत (राज्य) का काम सिर्फ आम जनता के लिए है इन सार्वजनिक मिल्कियात का शहरीयों के फायदे के मुताबिक प्रबंध (इंतज़ाम) देखना है। 

⭐यह हुक्म अल्लाह के रसूल (صلى الله عليه وسلم) की इस हदीस से निकाला गया है, जिसमें आप (صلى الله عليه وسلم) ने फरमाया:

الْمُسْلِمُونَ شُرَكَاءُ فِي ثَلاَثٍ : فِي الْمَاءِ ، وَالْكَلإِ ، وَالنَّارِ

📌मुसलमान तीन चीज़ें - पानी, चारागाहें और आग - में शरीक है।📌 📚 (अहमद और इब्ने माजा)

👉हालांकि इस हदीस में सिर्फ तीन चीज़ो का ज़िक्र किया गया मगर इस हदीस में यह इल्लाह (वजह) पाई जाती है की इन तीनों चीज़ो से सभी इंसानों की ज़िन्दगी की बुनियादी ज़रूरतें पूरी होती है इसलिए इल्लाह की वजह से यह हुक्म उन सभी चीज़ों पर लागू होगा जिनमें यह इल्लाह पाई जायेगी, इस तरह वोह सभी चीज़े भी अपने आप सार्वजनिक क्षेत्र (पब्लिक प्रोपर्टी) में आ जायेगी जो लोगो की बुनियादी ज़रूरियात का हिस्सा बन चुकी है जैसे पानी के सभी साधन, जंगलात, तेल के कुंए और मैदान, मस्जिदें, राज्य के स्कूल, अस्पताल, कोयले की खानें, इलेक्ट्रिसिटी के प्लांट, सड़के, नदियां, झीलें, तालाब, समुद्र, नहरें, खाईयां और बांध वगैराह। यह सभी चीज़े जनता के फायदे की है इसलिए यह पब्लिक प्रोपर्टी की श्रेणी में आयेगी।

✅ इस्लाम उन चीज़ों की निजी मिल्कियत मे देता है जो इंसानी समाज की बक़ा के लिए ज़रूरी नही है। इस समाधान से समाज पर अदभुत असर पड़ेगा और ज़िन्दगी की सभी बुनियादी ज़रूरतें सबको मुहय्या होती है और इस तरीक़े से जनता मंहगाई और लोगों की मनमानी से लोग बच जाते है।

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